लो जी हो गया बंटाधार........... इसे कह्ते है, गये थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास । जी ..हमारे क्रिकेटरों की ही बात हो रही है । कहां विश्व कप शुरू होने से पहले हम विश्व कप के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे थे और कहां विश्व कप मे हमारी हवा सेमी फाईनल से पहले ही निकल गई । अब तो नौबत ये है की हमारे नौनिहालों को बीसीसीआई से प्रेम-पत्र भी आने शुरू हो गये है । हार जाना ज्यादा बुरा नही लगा क्यूंकी खेल का एक हिस्सा हार ही होता है और इसे स्वीकारना भी सबों को आना चाहिए...। मगर जो बात सबसे बुरी लग रही है वो है कुछ खिलाडियों का दिनो दिन बदतमीज होते जाना ।
पहले हम पाकिस्तानियों की अभद्रता पर हमेशा कहते थे की उनके बोर्ड का खिलाडियों पर कभी नियंत्रण नही रहता है । मगर वेस्ट इंडीज मे जो कारनामा हमारे क्रिकेटर पहलवानों ने किया वो वाकई हमारे सर को शर्म से झुका देने वाला है । 6 खिलाडियों को बीसीसीआई ने प्रेम पत्र भेजा है जिसमे उनके प्रदर्शन और उनके व्यवहारों पर जवाब मांगा गया है । कोई कुछ भी कह ले मगर जो प्रदर्शन लगातार दो विश्व कप मे भारतीय क्रिकेट टीम का रहा है वो कही न कही आई0 पी0 एल0 के दुष्प्रभाव का ही प्रभाव नजर आता है ।
खैर, खेल के मैदान मे जो भद्द पिटवानी थी वो तो हो गई थी मगर वेस्ट इंडीज के पब मे जाकर जो कूदा-फांदी इन क्रिकेटर ने मचाया वो वाकई सोचने पर बडा अजीब सा लगता है । आज के हमारे नये क्रिकेटरों मे पार्टी का बडा शौक नजर आता है । मैच जीते या हारे इसकी परवाह शायद इतनी, इन्हे नही रहती है जितनी की मैच के बाद होने वाली पार्टियों की ललक इनमें देखी जा रही है । वैसे ये पार्टी का चलन भी आई0 पी0 एल0 की ही देन है । आई0 पी0 एल0 मे मैच के बाद क्या जबरदस्त पार्टी होती है ये आज किसी से छिपी नही है । यहां तो क्रिस गेल जैसे वेस्टइंडीयन भी कुर्ता फाड नृत्य करते नजर आ जाते है ।
अब कहते है न कि आदत जब पड जाती है तब उसे छुडाने मे बडी मुश्किल का सामना करना पडता है । और एक बात ये भी है की मुट्ठीभर संकल्पवान लोग, जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं। तो हमारे मुट्ठीभर संकल्पवान क्रिकेटर पहुंच गये इतिहास की धारा बदलने पब मे और लगे अपने प्रशंसकों से ही दो-दो हाथ करने । अब इसमे अगर कुर्ता फट ही गया तो क्या ..अरे ये सब तो चलता ही रहता है । नेहरा भाई लाख कह ले मगर जो कुछ भी देखा या सुना गया है, वो प्रशंसनीय तो नही ही कहा जायेगा ।
वे ही विजयी हो सकते हैं जिनमें विश्वास है कि वे विजयी होंगे । मगर हमारे भारतीय क्रिकेट टीम को देख कर क्या ऐसा लग रहा था कि इनमे विजयी होने का विश्वास है । एक बात और ये है कि आज कल खिलाडियों को अपनी चोट छिपाने की एक बुरी आदत भी हो गई है । जिसका भी खामियाजा आये दिन टीम इंडिया को भुगतना पड रहा है । जो हाल आज कल के मोटू-तोंदू खिलाडियों का है वो हमारे कोच ने अपनी रिपोर्ट मे दे दिया है । कोच ने तो यहां तक कह दिया की वो आज के कई खिलाडियों से ज्यादा फिट है । सही भी है ... पर हां एक बात उडते उडते आयी है कोच महोदय... कि आपके कमरे मे भी रात के 2 बजे तक लडक़ियां घुसी रह्ती थी !
मैं भी नही भूला और शर्तिया कह सकता हूं कि आप भी नही भूले होंगे वो हैदराबाद का मैच जब महान सचिन ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ एक जबरदस्त जुझारु पारी खेली थी मगर जीत के कुछ कदम दूर हम रह गये थे । तब सचिन ने 175 रन 141 गेंदों मे बनाए थे और भारत 3 रन से इस मैच को हार गया था । मैच का सर्वश्रेठ खिलाडी सचिन ही बने थे और जब उनसे उनके खेल से सम्बन्धित प्रश्न पूछा गया तब उनके चेहरे पर एक अनकहा सा मैच हारने का दर्द साफ तौर पर देखा गया था । उन्होने तब एक बात कही थी कि वो आज भी जानते है की भारत के तरफ से खेलना उनके लिए कितनी बडी बात है । बताते चले कि जहां एक तरफ सचिन उस मैच के हारने पर बहुत ज्यादा उदास थे वहीं उसी रात हमारे बाकी कई खिलाडी एक रंगीन पार्टी का मजा लेने मे व्यस्त थे । असफलता यह बताती है कि सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं किया गया , लेकिन अगर आप इससे कोई सीख न ले तो फिर आप देश के प्रतिनिधि कैसे माने जाये ? आज इस बात मे तो कोई दो राय नही है कि हमारे क्रिकेटरों के पास पैसा बहुत आ गया है , मगर वो ये भी जान ले कि ये क्रिकेट ही है जिसने उन्हे इतना पैसा दिया है । अगर क्रिकेट नही तो फिर बाकी कुछ भी नही । इतिहास इस बात का साक्षी है कि किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित नहीं किया जाता। समाज तो उसी का सम्मान करता है, जिससे उसे कुछ प्राप्त होता है। आप देश और समाज से अपने को अलग नही कर सकते है बन्धु । और अगर आपको सम्मान प्राप्त करना है तो कही ना कही अपने आचरण को सुधारने का प्रयास तो जरूर ही करना पडेगा। एक बात तो कबीर जी भी कह गये है की “मान सहित विष खाय के , शम्भु भये जगदीश । बिना मान अमृत पिये , राहु कटायो शीश? ।
अत: समय रहते अपने आचरण मे सुधार कर सके तो बढिया है, नही तो आपके मालिक तो है ही ! और वैसे भी हमारे देश मे क्रिकेटरों की कोई कमी थोडे ही न है । और आप ये भी जान ले कि परिवर्तन विज्ञानसम्मत है । परिवर्तन को अस्वीकार नहीं किया जा सकता जबकि प्रगति, राय और विवाद का विषय है । अगर परिवर्तन हो गया तो फिर आपलोगों की प्रगति भी राय और विवाद का विषय ही बन कर रह जाएगी । और कोच महोदय आपको तो ये मानना होगा की शिक्षा और प्रशिक्षण का एकमात्र उद्देश्य समस्या-समाधान होना चाहिये । तो लग जाए समस्या के समाधान मे और इसके लिए जितने तोंदो को कम करना पडे करिये, लेकिन देर रात तक आप भी जागा न करें क्या पता कल आपका तोंद निकल आया तो ? और प्रिय खिलाडी जन आप अपने को ज्ञानी बनाए क्यूंकि जो ज्ञानी होता है वही अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता है।

3 comments:
Badhiya lekh...
well written article
nice one !!!
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